HAMARA SANSKRITIK CHINTAN
Language: Hindi Publication details: New Delhi Prabhat Shankar 2025Edition: 1Description: 231ISBN:- 9789390923106
- H SUR
| Item type | Current library | Collection | Call number | Status | Date due | Barcode | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
Lending
|
Ernakulam Public Library General Stacks | Non-fiction | H SUR (Browse shelf(Opens below)) | Available | H119675 |
Browsing Ernakulam Public Library shelves, Shelving location: General Stacks, Collection: Non-fiction Close shelf browser (Hides shelf browser)
| H SUB/JA JANMAM | H SUK/JA JALAMSAM /ജലാംശം | H SUN/DR DRISYA VALACHAYUDE RASATHANDRAM : PADANAM SAMVADAM ABHIMUKHAM | H SUR HAMARA SANSKRITIK CHINTAN | H SUR/CI CINIMA : Akhyanathinte Piriyan Kovanikal | H SUR/CI CINIMA : Akhyanathinte Piriyan Kovanikal | H SUR/CI CINIMA : Akhyanathinte Piriyan Kovanikal |
मृत्युंजय भारत क्या होता है? मृत्युंजय भारत वह वास्तविक रूप से सारे दुनिया को सही दिशा देनेवाला, कभी भी समाप्त न होनेवाला, ऐसा अगर कोई राष्ट्र है तो वह भारत राष्ट्र है। इसका कई प्रकार के शब्दों में वर्णन किया गया है। भारत का चिंतन क्या है, विकास के संदर्भ में हमारी सोच क्या है, एक बात ध्यान में आती है कि सभी ने केंद्र में किसे रखा है? विकास का विचार करते हैं तो सभी ने मनुष्य को केंद्र में रखा है। जब हम सुख-समृद्धि, समाधान की बात करते हैं, तो उसमें व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह, यह उसके केंद्र में, उसके चिंतन में मौजूद है। उसके विकास की कोई सीमा ही नहीं है, वह असीमित है। हम भूमि की पूजा करते हैं, हम नदियों की पूजा करते हैं, हम भवायु के रूप में भगवान् की पूजा करते हैं, हम पेड़-पौधों की पूजा करते हैं। यह क्या है सब। पागलपन नहीं है। इस पूजा भाव के साथ हमारे यहाँ संस्कार देने की बात आती है कि इनकी बड़ी कृपा है हमारे ऊपर
There are no comments on this title.