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NAKSALIYON KE BEECH MERE BEETE DINON KI ROMANCHAK GATHA

By: Language: Hindi Publication details: New Delhi Prabhat Prakashan 2021Edition: 1Description: 342ISBN:
  • 9789390923090
DDC classification:
  • HL ALP/NAK
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Item type Current library Collection Call number Status Date due Barcode
Lending Lending Ernakulam Public Library General Stacks Non-fiction HL ALP/NAK (Browse shelf(Opens below)) Available H119677

2010 में जब भारत सरकार देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी ला रही थी, तो उस समय अल्पा शाह गुरिल्ला प्लाटून केसाथ उन्हीं इलाकों की 250 किलोमीटर लंबे सात रातों के सफर पर निकलीं। एक मानव विज्ञानी केरूप में वह समझना चाहती थीं कि एक नए भारत के उदय की पृष्ठभूम में, क्यों देश के गरीबों ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र से मुझेहाँह मोड़कर क्रांतिकारी विचारधारा के साथ एकजुटता दिखाई? गहरे हरे रंग की छापामारा वर्दी पहने, पुरुष के वेश में अल्पा प्लाटून में एकमात्र महिला और एकमात्र ऐसी इनसान थीं जिसके पास बंदूक नहीं थी। कष्टों से भरी उनकी इस यात्रा ने यह खुलासा किया कि क्यों विभिन्न पृष्ठभूमियों केलोग, दुनिया को बदलने के लिए हथियार उठाकर एक साथ इकट्ठा हो गए थे; और साथ ही किन वजहों से फिर उनमें बिखराव हुआ? अल्पा शाह सालों के शोध के साथ ही नक्सलियों के गढ़ में आदिवासी समुदायों के साथ, उनके रोजमर्रा के जीवन में इतना घुलमिल गई थीं कि उनकी पुस्तक ‘नक्सलियों के बीच मेरे बीते दिनों की रोमांचक गाथा’ में वह गइराई और घनिष्ठता साफ नजर आती है और पुस्तक एक थ्रिलर की तरह हमारी आँखों के सामने से गुजरती है। इसी गहन अध्ययन और शोध से पुस्तक में आदिवासी जीवन और उसका संघर्ष जीवंत हो उठता है। यह कृति समकालीन भारत के बीचोबीच आर्थिक वृद्धि, बढ़ती असमानता, विस्थापन और संघर्ष का प्रतिबिंम्ब प्रस्तुत करती है।.

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