Ramesh Pokhriyal Nishank

MANAVATA KE PRANETA :Maharshi Arvind - 1 - New Delhi Prabhat Prakashan 2021 - 206

महर्षि अरविंद एक महान् दार्शनिक, महान् स्वाधीनता सेनानी, प्रकांड विद्वान्, अद्भुत कवि, राजनेता व लेखक थे। उन्होंने सुप्त भारतीय जनमानस को जगाने का सफलतम प्रयास किया और उनके भीतर एक नए आत्मविश्वास का संचार करने में सफलता पाई। वे भारतीय राजनीति यानी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में 1905 से 1910 तक केवल पाँच वर्ष रहे और इतनी अल्पावधि में देश के जनमानस को राजनीतिक रूप से इतना समर्थ बना दिया कि वह अपनी वास्तविक हस्ती को पहचान सके और अपने अतीत की खोई गरिमा और महिमा को पुनः अर्जित करने के लिए समर्पित हो। महर्षि अरविंद पहले एक राजनीतिज्ञ, क्रांतिकारी नेता थे लेकिन दैवीय विधान के चलते वे अध्यात्म की ओर मुड़ गए, क्योंकि उन्होंने यह जाना कि आध्यात्मिक उत्थान के बगैर भारत की स्वतंत्रता अर्थहीन है। इसीलिए उन्होंने भारत को आध्यात्मिक रूप से एक करने के लिए वेद, उपनिषद् व भारतीय ज्ञान-परंपरा की पताका विश्वभर में फैलाई ताकि भारतीयों में अपने ज्ञान के प्रति गौरव-महसूस हो सके। जनसांख्यकीय लाभांश के चलते भारत युवा देश है। आज के परिदृश्य में भारत को उसका पुराना वैभव दिलाने और देश को ज्ञान-आधारित महाशक्ति बनाने हेतु श्रीअरविंद के विचार अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। नवभारत के निर्माण की जिम्मेदारी हमारी युवाशक्ति पर है। देश के शिक्षा मंत्री द्वारा इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर यह पुस्तक लिखी गई है।

9789390366644

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HL / RAM